अफगानिस्तान में बर्फबारी-बारिश से तबाही, 61 की मौत

Sat 24-Jan-2026,11:58 PM IST +05:30

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अफगानिस्तान में बर्फबारी-बारिश से तबाही, 61 की मौत Afghanistan Weather Disaster
  • 15 प्रांत भारी बर्फबारी और बारिश से प्रभावित.

  • 61 मौतें, 110 से अधिक घायल.

  • सैकड़ों गांवों का संपर्क टूटा, राहत कार्य मुश्किल.

Ghazni / Ghazni :

Afghanistan / अफगानिस्तान इन दिनों भीषण प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। बीते तीन दिनों से लगातार हो रही भारी बर्फबारी और मूसलाधार बारिश ने देश के कई हिस्सों में तबाही मचा दी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, अब तक कम से कम 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 110 से अधिक लोग घायल हुए हैं। खराब मौसम के कारण राहत और बचाव कार्यों में भारी मुश्किलें आ रही हैं, जिससे हालात और भी चिंताजनक बने हुए हैं।

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता यूसुफ हम्माद ने बताया कि अफगानिस्तान के 34 में से 15 प्रांत इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि सैकड़ों गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में सड़कें बर्फ से ढकी हुई हैं, जिससे राहत दलों के लिए वहां तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है। कई जगहों पर वाहन फिसलने के कारण रास्ते बंद हो गए हैं और हेलीकॉप्टर सेवाओं का सहारा लेना भी मौसम की वजह से आसान नहीं हो पा रहा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 458 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में पशुधन की भी मौत हुई है, जो ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन होते हैं। पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहे लोगों के लिए यह नुकसान किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे दूरस्थ इलाकों से जानकारी सामने आ रही है, मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है।

अफगानिस्तान लंबे समय से चरम मौसम की घटनाओं के प्रति बेहद संवेदनशील रहा है। अचानक आने वाली बाढ़, भारी बारिश और बर्फबारी हर साल यहां दर्जनों, तो कभी-कभी सैकड़ों लोगों की जान ले लेती हैं। साल 2024 में वसंत ऋतु के दौरान आई बाढ़ में 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि दशकों से चला आ रहा संघर्ष, कमजोर बुनियादी ढांचा, व्यापक गरीबी, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव ने प्राकृतिक आपदाओं को और भी घातक बना दिया है।

ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में कच्चे और कमजोर मकान हैं, जो भारी बारिश या बर्फबारी का दबाव सहन नहीं कर पाते। स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि देश के पूर्वी हिस्से अभी भी पिछले साल आए भीषण भूकंपों से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। अगस्त और नवंबर में आए इन भूकंपों में 2,200 से अधिक लोगों की जान गई थी और हजारों परिवार बेघर हो गए थे।

यूनिसेफ के अनुसार, भूकंप प्रभावित इलाकों में लगभग 2.7 लाख बच्चे जानलेवा ठंड, कुपोषण और बीमारियों के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। उधर, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो 2026 तक अफगानिस्तान दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बना रह सकता है। संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार संगठनों ने देश में करीब 1.8 करोड़ जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए 1.7 अरब डॉलर की आपात अपील जारी की है।

इस समय अफगानिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और त्वरित मानवीय सहायता बेहद जरूरी हो गई है, ताकि इस त्रासदी से जूझ रहे लाखों लोगों को राहत और सुरक्षा मिल सके।